बोल, कि लब आज़ाद हैं तेरे बोल, ज़बां अब तक तेरी है तेरा सुतवां जिस्म है तेरा बोल, कि जाँ अब तक तेरी है देख कि आहन-गर की दुकां में तुन्द हैं शोले, सुर्ख हैं आहन खुलने लगे कुफ्लों के दहाने फैला हर इक ज़ंजीर का दामन बोल, कि थोड़ा वक्त बहुत है ज़िस्मों....
SEPTEMBER 28 – MASS RALLY
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